तुम सरकार के नुमाइंदे होगे, तुम किसी राजनीतिक दल के पक्षधर होगे, तुम किसी धर्म के प्रचारक होगे, तुम गरीब होगे, तुम दलित होगे....
पर मैं तुम में से किसी से भी मुखातिब नहीं हूँ! मैं सिर्फ एक इंसान से अभी बात कर रहा हूँ....तुम इंसान तो हो ना? अगर नहीं, तो इसके आगे मत पढ़ना, तुम्हें समझ नहीं आएगा और अगर हाँ....तो अब तक चुप कैसे हो?
मैं इंसान हूँ, मगर मैं मर चुका हूं...खोखला हूँ अंदर से...सड़ चुका हूँ... कीड़े लग रहे हैं मुझमें... पिस्सू जानते हो? वही वाले कीड़े... सफेद, छोटे, रेंगने वाले कीड़े! मैं गल रहा हूँ, खत्म होने वाला हूँ....मगर क्यों?
क्योंकि मैं जीवित नहीं हूँ, मैं लाश हूँ! ज़िंदा मगर खोखली, कीड़े लगी लाश।
मैं कभी गर्व करता था, हज़ारों योनियों में जन्म लेने के बाद इंसानी रूप में पैदा होने पर। मैंने, कुत्तों, सुअरों, केचुओं, पिस्सुओं, जुओं को खुद से हीन प्रजाति का जानवर माना था। पर मैं कितना गलत था। मैं कुत्तों के बदन पर चलने वाली किलनी से भी हीन हूँ। अब गर्व करने को बचा ही क्या है! मैं इंसान तो रह नहीं गया। चारों ओर यही तो है। जरजर समाज, दो कौड़ी की परंपराएं और हवस से भरी आत्मा।
8 साल...महज़ 8 साल की उम्र, जिसमें सौभाग्य प्राप्त बच्चे माँ के आंचल में और पिता के कंधों पर खेलते कूदते बड़े होते हैं, उस उम्र में एक मासूम बच्ची को, कुछ दरिंदों ने, अपनी भूख मिटाने के लिए इस्तेमाल किया और फिर उसकी निर्मम हत्या कर दी।
इंसान कहते हैं वो खुद को, और उसके ऊपर से मर्द!
अब उन्होंने छोड़ा ही क्या है हमारे लिए, 'मर्दों' के लिए...
आओ मिल कर मुंह छुपाते हैं। वो जैसे मरने के बाद ढक दिया जाता है ना, वैसे ही...
माफ करना आसिफा, अफसोस है मुझे, मर्द मुर्दा बन चुका है!
#आशुतोष
This is my personal blog about my personal thoughts. Every person has a world deep inside him, the feelings and emotions which a person never share, even with himself or herself. The world which knows everything about that person, the world which no one else can see, the world which is buried deep inside our soul, its 'The World Within'
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Friday, 13 April 2018
मुर्दा मर्द
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