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Friday, 30 May 2014

लारा ( भाग- 5)


                लेखक: आशुतोष अस्थाना 


                 (मेरे पहले दोस्त की स्मृति में....)  










कहते हैं समय हर घाव भर देता है, देखते-देखते लारा के सारे घाव भर गए लेकिन भीकू को दिया हुआ वादा अब तक उसके मन में कांटे की तरह चुभ रहा था. कई दिन होगये, बाहरी कुत्तों ने हमला भी नहीं किया, लेकिन लारा और भीकू हर रात उनकी तलाश में शहर के अलग-अलग इलाकों में खोज करने जाते थे. लारा अब छह साल का होगया था और उसका कब भी विशाल होगया था. दूसरे कुत्ते उसे दूर से ही देख कर डर जाते थे, लेकिन उसे तो एक बार अपने दुश्मनों को देख कर डराना था. वो वक्त के साथ और फुर्तीला होगया था. अपने अनजान दुश्मनों से सामना करने के लिए हर दिन अपने आप को तयार करता रहता था. वो अक्सर अपने दोस्तों से उन कुत्तों के बारे में पूछता रहता था की वो दीखते कैसे हैं, उनका कद कितना बड़ा है, और उसी हिसाब से अपने मन में उनका एक चित्र बनाकर उसी तरह उनके खिलाफ अपने आप को तयार करता था.

ठण्ड का मौसम था, और अधिकतर लोग शाम से ही अपने-अपने घरों के अंदर चले जाते थे. एक दिन शाम के करीब आठ या नौ बज रहे थे. और लारा के घर वाले अंदर थे. लारा के लिए बाहर एक कमरा बना था, वो उसी में सो रहा था. तभी उसने दूर किसी कुत्ते का शोर सुना. वो तुरंत चौंक कर उठा. और ध्यान से सुनने लगा. उसे फिर से वही शोर सुनाई दिया. लारा दौड़ते हुए गेट के पास गया लेकिन गेट बंद था. उसने उछल कर उसे फांदने की कोशिश की लेकिन गेट काफी ऊँचा था. वो शोर बढ़ता जारहा था. वो समझ गया की कुछ तो गड़बड़ है. तुरंत उसने अपना दिमाग चलाया और घर की छत पे सीढियों से भागा. बालकनी से गेट की दुरी कम थी लेकिन ऊंचाई बहुत ज़्यादा थी. उसने एक पल भी नहीं सोचा और गेट के बाहर कूद गया! बिना समय गवाए वो भीकू के घर की ओर गया, लेकिन भीकू अपने घर में नहीं था!
लारा के दिमाग में कई भयानक ख्याल आने लगे. उसे लगा कही वो आवाज़ भीकू की तो नहीं थी! वो दौड़ते-दौड़ते पागलों की तरह औरों से पूछने लगा. तब किसी ने बताया भीकू चरही से पानी पीने गया था. वो तुरंत उस ओर गया और दूर से उसने देखा, भीकू घायल ज़मीन पे पड़ा था और दर्द से कराह रहा था. “भीकू! लारा ने चिल्लाया.” भीकू कुछ बोल नहीं पारहा था. “किसने किया, जल्दी बताओ!!” भीकू सिर्फ इतना ही बोल पाया, “उस तरफ!” और गली की तरफ इशारा कर दिया. 

लारा उस गली की ओर गया, और भागते-भागते वो खूब दूर निकल आया और एक नए इलाके में पहुँच गया. उससे पहले वो उस इलाके में कभी नहीं आया था. वो इलाका बहुत अजीब सा था. बड़े-बड़े घर थे और सडकों पे बिलकुल भी गंदगी नहीं थी. तभी उसकी नज़र दूर कुछ कुत्तों पे पड़ी. वे पांच या छह थे और झुण्ड बना कर खड़े हंस रहे थे. लारा एक दीवार के पीछे जाकर छुप गया और उनकी बातें सुनने लगा. “यार अब तो वो इलाका हमारा ही होगा!” उन में से एक ने कहा. “अब कौन रोकेगा हमे वहा, उस बूढ़े कुत्ते को तो हम मार ही चुके हैं बस अब हमारे शेरू भाई वहा राज करेंगे!” लारा समझ गया की वो वही कुत्ते हैं जिनको सबक सिखाने का सपना उसने हमेशा देखा है. वो दूसरे सड़की कुत्तों से बड़े दिख रहे थे, और कुछ ज़्यादा ही खूंखार!
उनका कद लारा जितना ही था और शरीर भी मज़बूत था लेकिन उन्हें देख कर लारा डरा नहीं और सोचा बस यही मौका है उन सबको मार गिराने का! उसने उनकी ओर पहला कदम बढ़ाया ही था की अचानक एक जानवर दूसरी गली से निकल कर उन कुत्तों की ओर आया और उनसे बातें करने लगा. 

लारा ने उस तरह का कभी कोई जानवर नहीं देखा था. वो बड़ा ही अजीब था, दिखने में किसी गधे की तरह ऊँचा और लम्बा था, लेकिन उसका मुह किसी कुत्ते की तरह था. उसके कान कुछ अधिक लम्बे थे मुह तो बहुत बड़ा था. लारा को समझ नहीं आया की वो है क्या चीज़, तभी अचानक उसे याद आया एक बार दादा जी ने बताया था की जिस कुत्ते ने भीकू के पिता को मारा था वो बहुत ही अजीब तरह का दिखता था. बस तभी लारा को याद आगया दादा जी ने उसे उस कुत्ते की प्रजाति के बारे में भी बताया था! वो था ग्रेट डेन!! उसको दादा जी की कही एक-एक बात याद आगई. उन्होंने उसे बताया था की वो कुत्तों की दुनिया का सबसे खतरनाक प्रजाति का कुत्ता है जिससे हर कुत्ता डरता है. वो बहुत मजबूत होता है, और इंसान को भी मार सकता है. वो अपने साथियों से बात कर रहा था. “अब मुझे वो इलाका चाहिए, जब से मेरे मालिक ने मुझे घर से भगाया है, तबसे मैं कोई अच्छा इलाका ढूंड रहा हूँ, और उस इलाके से अच्छा दूसरा कोई नहीं है!”

तभी उनमें से एक कुत्ते ने डरते हुए शेरू से कहा, “शेरू भाई एक बात पूछें, बुरा मत मानियेगा..लेकिन..लेकिन ..आप को..बाहर क्यों..मतलब बाहर क्यों निकल दिया आपके घर से?” शेरू उस कुत्ते की ओर घूरने लगा और उसके पास जाके खड़ा होगया. वो कुत्ता उसके सामने बच्चा लग रहा था. वो उस कुत्ते की तरफ गुस्से से देख रहा था और फिर ज़ोर से हँसने लगा. “बस इतनी सी बात पूछने के लिए इतना क्या घबरा रहा है बे! वो बात ये है की जिस घर में मुझे रखा गया था, उस घर के एक बच्चे को मैंने बहुत बुरी तरह काट लिया था, शायद मर गया होगा साला!” उसकी बात सुन के सब शांत होगये.

(शेष कहानी अगले भाग में....)
          

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